ज़िन्दगी मुस्कान है

पिछले साल सोचा था कि हिंदी में लिखेंगे। वोह तो हुआ नहीं। अब पहले दिन से ही भली शुरुआत कर रहा हूँ।

अक्सर यह देखा है कि ज़िन्दगी से मायूस होते हैं, इससे मोहब्बत नहीं रहती। मज़ाक कि बात नहीं लगती कि हम इसकी बेवफाईओं के कारण इससे नफरत करना जानते हैं, यह भूल जाते हैं कि बेवफा ही सही पर है तो एक ही? यह चली गयी तो जायेंगे कहाँ?

तो इस साल थोडा उम्मीद से शुरू हो, थोड़ी आशा कि ओर चले, इस आरज़ू के साथ आपको एक तोहफा देता हूँ…

 

ज़िन्दगी मुस्कान है

ज़िन्दगी मुस्कान है,

इसे आंसू की भेंट न चढ़ा,

मुसाफिर हो, मंज़िल ख़ुशी है,

दर्द की सराय में घर न बसा,

 

जिन ज़ख्मों को आज सम्भालते हो,

कल इनके दाग़ भी मुस्कुराहट देंगे,

जो आज भारी दर्द लगते हैं,

वोह किस्से कल मज़ाक लगेंगे,

 

जिन पे कल हँसोगे, उन पे आज ही ठहका लगा,

ज़िन्दगी मुस्कान है, इसे आंसू की भेंट न चढ़ा…

 

और कब तक धरे रखोगे सीने में शिकवे,

वक़्त की रफ़्तार के आगे हर बात छोटी है,

जिन घेरों में हम और तुम जीते हैं,

उन घेरों कि कायनात छोटी है,

 

तोड़ बंधन घेरों के, ज़िन्दगी को गले लगा,

ज़िन्दगी मुस्कान है, इसे आंसू की भेंट न चढ़ा…

 

ज़माने में इतने मुखौटे देखे हैं,

हर सूरत जानी-पहचानी लगती है,

अब सोच भी नयी मांग के लेते हैं,

उधार की सबकी पैशानी लगती है,

 

मुखौटों-उधारों से आगे, तू अपना नाम कहला,

ज़िन्दगी मुस्कान है, इसे आंसू कि भेंट न चढ़ा…

 


कुछ औरों के किस्से हैं, कुछ मेरी कल्पना है – सब अपने ही तजुर्बे हैं। कविता कैसी लगी, कमेंट्स में लिखकर बताइएगा…

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One Comment Add yours

  1. Anonymous says:

    Simply superb….no words to describe

    Like

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