बातें

कल किसी से बात चल रही थी। उनकी एक बात से कुछ ख्याल आया, खूबसूरत था। उस ख्याल को उनसे बातों बातों में यूँ पिरोया।

गर अच्छा लगे तो कहिएगा…

बातें

बातें दिलों कि होती हैं,

दो लोगों की कहानी कहती हैं,

 

कभी राज़ बताती हैं, कभी खेल खिलाती हैं,

और कभी यूँ ही बहती हैं,

आने वाले कल के सपनों में रंगी,

गुज़रे दिनों की निशानी रहती हैं,

 

तुम्हारी याद में रोती हैं, तुम्हारे साथ ही हँसती हैं,

जो तुम रूठो तो सन्नाटे सहती हैं,

कभी किताबों में चलती हैं, कभी ख्वाबों में जलती हैं,

तुम्हारे नाम के इन्तज़ार में रहती हैं,

 

काफ़ी देर से ये बातें की नहीं तुमसे, आ जाओ,

बातें जो लफ्ज़ों में ही नहीं, आ जाओ,

आ जाओ कहीं ये बातें खत्म नहीं हो जायें,

ये बातें तो धडकनों में रहती हैं,

 

बातें दिलों कि होती हैं,

तुम्हारी मेरी कहानी कहती हैं…

 


Your thoughts, your criticism, your feedback – all are very welcome. They help me know if what I’ve written resonates with you.

Please consider leaving a comment below and telling me how this piece made you feel.

Advertisements

One Comment Add yours

  1. Anamika says:

    कविता अच्छी है, अौर ख़्याल भी। लहज़ा भी ज़रा सरल है, बातुनी-सा, लेकिन कहीं-कहीं तुमने तुकबंदी का उपयोग किया है; इसकी वजह? अौर, ऐसा प्रतीत होता है कि शायद, कहीं-कहीं, यह कविता अधूरी है, उस ख़्याल का केवल एक हिस्सा… इसमें कोई सच्चाई?

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s